ग़ज़ल
वैसे मैंने अभी तक किया तो नहीं।
प्यार "ज्ञानेश" करना ख़ता तो नहीं।।
आपको जो भी कहना था, सब कह दिया?
आपको हमसे अब कुछ , गिला तो नहीं।।
किस लिए मुझपे बाग़ी का इल्ज़ाम है।
झूठ को झूठ कहना, ख़ता तो नहीं।।
तोहफातन फूल भेजे हैं, किसने हमें।
ये हमारी वफ़ा का, सिला तो नहीं।।
जाने क्यों उनकी नज़रों में, मुजरिम हैं हम।
जबकि कुछ हमसे ऐसा हुआ तो नहीं।
हमने दिल खोलकर रख दिया सामने।
यानि अब आपसे कुछ, छुपा तो नहीं।।
मैं दुआ जानता हूँ, पता तो करो।
उसके लब पे कहीं बद्दुआ तो नहीं।।
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ज्ञानेश्वर आनन्द ज्ञानेश किरतपुरी
राजस्व एवं कर निरीक्षक
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कृपया मार्गदर्शन करें धन्यवाद