Sunday, November 28, 2021

नशा मुक्ति पर स्वरचित दोहे

नशा मुक्ति पर कुछ दोहे लिखे हैं-👇 
1-दुनिया में नशा मुक्ति का, हो कोई अभियान।
   जीवन  बचे  कलंक से,   समझो ए नादान।।
2- धूम्रपान से लाभ नहीं, खुद का भी नुक्सान।
    धूम्रपान को त्याग कर, मिलता है सम्मान।।
3- दिल से जो कोशिश करें, छोड़े वो धूम्रपान।
    जीवन सफल बनाइए , छोड़ कर धूम्रपान।।
4- नित नित  बढ़ती है सदा , गृह कलेश की बात।
    दिन काटे कटता नहीं ,  कटै नहीं ये रात।।
5- शराबी जब नशा करे , घर में करें उत्पात।
    तिल-तिल कर मिटती रहे, यह नारी की जात।।
6-खुशियाँ भी ओझल हुईं, सुख मिले नहीं चैन।
   जीवन दूभर हो रहा , दिन हो चाहे रैन।।
7-नशा बना अभिशाप है, हो शरीर का नाश।
   जगत में नशा आज तो, बना गले का फाँस।।
8-कलंक बने समाज में, नशा पाप का मूल।
   घुटन सी महसूस करे,चुभता जैसे शूल।।
9- छोड़ो नशा तुम आज से, करो प्रतिज्ञा आज।
     खुशियों से घर हो भरा, बैठो बीच समाज।।10-नज़रें बच्चों पर रखें, दियो उन्हें समझाय।
      संग नशे का है बुरा, निकट कभी ना जाय।।
11- नशा एक नासूर है, रहिए इससे दूर।
      मान घटे संसार में, साए भी हों दूर।।
12- करिए मदद ग़रीब की,अच्छे कीजै काम।
      ग़ैर का भी हो भला, हो अपना भी नाम।।
13-"ज्ञानेश" इस समाज में, कियो कोई सुधार।
      जीवन सफल बनाइए, कर कोई उपकार।।
            दोहाकार 
ज्ञानेश्वर आनन्द "ज्ञानेश" किरतपुरी
बसी किरतपुर
जनपद बिजनौर (उत्तर प्रदेश)

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