ग़ज़ल
कह तो दो तुम उसको ये बात।
ध्यान रहे के उसे बुरा ना लगे।।
ध्यान रहे के उसे बुरा ना लगे।।
मत सताओ मुझको कर ज़ाया।
बात कहूं तो उसे बुरा ना लगे।।
बात कहूं तो उसे बुरा ना लगे।।
पता था मुझको तेरी हर बात।
ज़ाहिर नहीं की के बुरा ना लगे।।
ज़ाहिर नहीं की के बुरा ना लगे।।
कद्र करता हूं तेरे वो जज़्बात।
सोचता हूं के उसे बुरा ना लगे।।
सोचता हूं के उसे बुरा ना लगे।।
तेरी आंखों में छाई है कोई बात।
कह दूं तो कहीं उसे बुरा ना लगे।।
कह दूं तो कहीं उसे बुरा ना लगे।।
भारती करता है ख़ुलूस की बात।
सुकूं से रहने दो मुझे बुरा ना लगे।।
सुकूं से रहने दो मुझे बुरा ना लगे।।
कत्ल कर दिये उसने मेरे जज़्बात।
तिरछी नजरें ही कहीं छुरा ना लगे।।
तिरछी नजरें ही कहीं छुरा ना लगे।।
ग़ज़लकार
ज्ञानेश्वरानन्द "भारती"
कर निरीक्षक
© All Rights Reserved me.
ज्ञानेश्वरानन्द "भारती"
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