Tuesday, September 24, 2019

कैसा काम घिनौना कर डाला

भाजपा तूने कैसा काम घिनौना कर डाला
संत रविदास का मंदिर क्यों तुड़वा डाला।।

एक तरफ तुम कब से अयोध्या मंदिर-मंदिर चिल्लाये हो।
रविदास का छः सौ साल पुराना बना मंदिर तुड़वाये हो।।

मंदिर रविदास किसी की आस्था का प्रतीक तोड़कर।
क्या साबित करना चाहते हो उनका विश्वास तोड़कर।।

मूल निवासी को कष्ट पहुंचाकर खुश होते हो।
बाहर से आबड़े आर्य तुम क्यों यहां रहते हो।।

तनिक भी शर्म रही हो तो अयोध्या में राम मंदिर के बदले रविदास मंदिर बनवा दो।

अपने दिलों से दुष्टतापूर्ण विचारों को बाहर कर किसी की आस्था को समझा दो।।

      रचनाकार
ज्ञानेश्वरानन्द भारती
राजस्व एवं कर निरीक्षक

Monday, September 23, 2019

इस निर्दयी संसार में

हे! प्रभु तेरे इस निर्दयी संसार में।
क्या एक दूसरे को नोच खायेंगे।।
कहां गए वो मिटने वाले प्यार में।
धोखा देने की रीति से क्या पायेंगे।।
इंसान में हैवान के लक्षण व्यवहार में।
प्राण निछावर कर दोस्त की खातिर
खुदा दोस्त बन नाम अमर कर जायेंगे।
रचनाकार
ज्ञानेश्वरानन्द भारती
राजस्व एवं कर निरीक्षक
© ® रचना के सर्वाधिकार सुरक्षित हैं।

"समाज का आईना"


             ग़ज़ल
जो नफरतें हैं तुम्हारे दिल में,
काश ये सियासत यूँ न होती।
जो खुलूस  था  मेरे  दिल में,
आज उसका भरम न होता।
हसरतें कितनी बढ़ गई इंसां की,
काश थोड़े में गुजारा होता।
कभी माँ बाप रहते थे साथ में,
आज बेटा उनसे न्यारा न होता।
माँ के बलिदानों का जरा सा भी,
अहसास दिल में हुआ होता।
टुकड़ा देने से पहले प्यार से बेटा,
एक बार मुख से बोला होता।
अपनी व्यथा को यूँ ही सहकर,
कोई बाप छुपकर रोया न होता ।
कहाँ गए वो रस्मों रिवाज दुनिया,
"भारती" आज लौटा दिया होता।
        रचनाकार
ज्ञानेश्वर आनन्द "ज्ञानेश" किरतपुरी
राजस्व एवं कर निरीक्षक
किरतपुर (बिजनौर)
© Copyright

उसे बुरा ना लगे

ग़ज़ल 
कह तो दो तुम उसको ये बात।
ध्यान रहे के उसे बुरा ना लगे।।
मत सताओ मुझको कर ज़ाया।
बात कहूं तो उसे बुरा ना लगे।।
पता था मुझको तेरी हर बात।
ज़ाहिर नहीं की के बुरा ना लगे।।
कद्र करता हूं तेरे वो जज़्बात।
सोचता हूं के उसे बुरा ना लगे।।
तेरी आंखों में छाई है कोई बात।
कह दूं तो कहीं उसे बुरा ना लगे।।
भारती करता है ख़ुलूस की बात।
सुकूं से रहने दो मुझे बुरा ना लगे।।
कत्ल कर दिये उसने मेरे जज़्बात।
तिरछी नजरें ही कहीं छुरा ना लगे।।
       ग़ज़लकार
ज्ञानेश्वरानन्द "भारती"
कर निरीक्षक
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