ज्ञानेश्वर आनन्द "ज्ञानेश" किरतपुरी
Thursday, October 14, 2021
ग़ज़ल का मतला
इस सूरत भी दुनिया में अब, ऐब छुपाए जाते हैं।
चाँद से उजले दामन पर कुछ, दाग़ लगाए जाते हैं।।
शायर
ज्ञानेश्वर आनन्द ज्ञानेश किरतपुरी
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