फायलातुन- फायलातुन - फऊलुन -फऊलुन - मुतदारिक
ग़ज़ल
अब हमें अपना मुकद्दर बनाना पड़ेगा।।
कुछ पाने को हाथ-पांव चलाना पड़ेगा।।
तुम गीतों में आनन्द तो चाहते हो मगर।
तुम्हें तरन्नुम से ग़ज़लों को गाना पड़ेगा।।
तुम्हें रश्मे उल्फत बढ़ाने से पहले मेरी जाँ।
दिल में मुहोब्बत का परचम लहराना पड़ेगा।।
मुश्किल में कुछ भी दिखाई नहीं देता अक्सर।
इस दिल की आंखों पे चश्मा लगाना पड़ेगा।।
खुदा का करम है या है मेरा ये मुकद्दर।
अब जिंदगी में मेरी तुमको आना पड़ेगा।।
क्या खबर थी के वबा फैलेगी "ज्ञानेश"।
कोरोना से घरों में सिमट जाना पड़ेगा।।
ग़ज़लकार
ज्ञानेश्वर आनन्द ज्ञानेश किरतपुरी
स्वरचित एवं मौलिक रचना के समस्त अधिकार सुरक्षित हैं। © ®
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कृपया मार्गदर्शन करें धन्यवाद