ग़ज़ल
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उसे देखकर ये दिल यूँ मचलता क्यों है।
तिरे आने से पहले दिल सँभलता क्यों है।।
तिरी याद आती है जब मुझे तन्हाई में।
इश्क़ की गर्मी से बदन जलता क्यों है।।
जब उसे मुझसे दूर ही जाना था तो।
प्यार आँखों से दिल में उतरता क्यों है।।
भोली सी सूरत क्या-क्या ज़ुल्म ढ़ाती है।
मेरा हर एक बोल उसे अख़रता क्यों है।
दुनिया जिसे नाहक बुरा समझती है।
ये इश्क़ ए जूनून दिल में पलता क्यों है।।
जब कोई उसकी बात करता है "ज्ञानेश"।
ये दिल टूट कर इतना बिखरता क्यों है।।
ग़ज़लकार
ज्ञानेश्वर आनन्द "ज्ञानेश" किरतपुरी
राजस्व एवं कर निरीक्षक
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