एक थैली के चट्टे-बट्टे
लोक लुभावन करते वादे और मूर्ख बनाते जनता को।
सब एक थैली के चट्टे-बट्टे हैं नहीं सुहाते जनता को।।
सब अपनी झोली भरते हैं जनता का ये क्या करते हैं।
पाँच साल तक खून चूसते कुछ नहीं बताते जनता को।।
बेशर्मी इनकी देखो कैसे वोट मांगते फिर जनता से।
एक दूजे पर दोषारोपण कर फिर धता बताते जनता को।।
पहले तो कुछ कर ना सके अब नये वादे करते जनता से।
महँगाई का रोना रोकर सब्ज बाग दिखाते जनता को।।
पढ़-लिख के भी पकौड़े तले तो क्या फायदा है पढ़ने का।
रोजगार को चौपट कर अब स्वप्न दिखाते जनता को।।
सरकारी सम्पत्तियाँ बेचकर पेट पालने वालों को देखो।
"ज्ञानेश"अपनों का हित साधने वाले तड़पाते जनता को।।
रचनाकार
ज्ञानेश्वर आनन्द ज्ञानेश किरतपुरी
राजस्व एवं कर निरीक्षक
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महोदय मेरे ब्लॉग पर पब्लिक कमेंट कैसे प्राप्त होंगे?
कृपया मार्गदर्शन करें धन्यवाद